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भारतीय नारायणी सेना
भारतीय नारायणी सेना : स्थापना की आवश्यकता और उद्देश्य
?? भारतीय नारायणी सेना ??
(श्री राधेनारायणी सेवा ट्रस्ट परिवार)
अध्यक्ष एवं संस्थापक का संदेश
प्रिय देशवासियों,
“सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है” — इसी मूल विचार को लेकर भारतीय नारायणी सेना की स्थापना की गई है। हमारा उद्देश्य केवल एक संगठन बनाना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक सहायता, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा पहुँचाना है।
आज के समय में समाज को ऐसे संगठित और समर्पित युवाओं की आवश्यकता है, जो निःस्वार्थ भाव से सेवा करें और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं। भारतीय नारायणी सेना उसी संकल्प का प्रतीक है।
हमारा यह संगठन किसी से कोई शुल्क या धन नहीं लेता, बल्कि पूरी पारदर्शिता के साथ सेवा कार्य करता है। सभी आर्थिक व्यवस्थाएँ श्री राधेनारायणी सेवा ट्रस्ट के माध्यम से संचालित होती हैं, जिससे समाज का विश्वास और संगठन की विश्वसनीयता बनी रहती है।
मैं सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से आग्रह करता हूँ कि वे अनुशासन, समर्पण और सेवा भावना के साथ कार्य करें। हमारा लक्ष्य केवल सहायता करना नहीं, बल्कि समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
आइए, हम सब मिलकर “सेवा, संस्कार और संगठन” के इस पवित्र मिशन को आगे बढ़ाएँ और एक सशक्त, संगठित एवं जागरूक समाज का निर्माण करें।
भारतीय नारायणी सेना
आज के बदलते राष्ट्रीय परिदृश्य में जब समाज अनेक प्रकार की वैचारिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब एक संगठित, जागरूक और राष्ट्रनिष्ठ शक्ति की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय नारायणी सेना की स्थापना का संकल्प लिया गया।
भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को सशक्त बनाने के उद्देश्य से संगठन का गठन किया गया। समाज में बढ़ती वैचारिक भ्रम की स्थिति, युवाओं में दिशा के अभाव, तथा राष्ट्रहित के मुद्दों पर संगठित आवाज़ की आवश्यकता ने इस संगठन की नींव को मजबूत किया।
संगठन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष शम्भूनाथ सनातनी जी ने यह अनुभव किया कि राष्ट्र और धर्म के प्रति समर्पित युवाशक्ति को एक मंच पर लाकर सकारात्मक, रचनात्मक और सेवा आधारित कार्यों में लगाया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से भारतीय नारायणी सेना की स्थापना की गई — ताकि समाज में राष्ट्रभक्ति, संस्कार, सेवा और संगठन की भावना को सुदृढ़ किया जा सके।
भारतीय नारायणी सेना केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक विचारधारा है —
जो राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वोपरि मानती है।
जो भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाने का संकल्प रखती है।
जो युवाओं को जागरूक, अनुशासित और राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरित करती है।
आज भारतीय नारायणी सेना समाज में सेवा, जागरण और संगठन के माध्यम से एक सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में कार्यरत है। यह संगठन उन सभी राष्ट्रप्रेमी नागरिकों का मंच है, जो भारत को सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से सशक्त देखना चाहते हैं।
“संगठन में शक्ति है, सेवा में समर्पण है, और राष्ट्र में हमारी पहचान है।”
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शम्भूनाथ सनातनी जी का संदेश
प्रिय भारतीय नारायणी सेना के सदस्यों एवं समस्त देशवासियों,यह मेरा सौभाग्य है, की हमारे आदर्श साक्षात् नारायण अवतार श्री कृष्ण जी और श्री राम जी जैसे देवो की भूमि, ऋषि मुनियों और परम वीरों, शहीदों, महापुरुषों की पवित्र धरती पर मेरा जन्म हुआ | मेरा रोम रोम, मेरा अंग अंग इस देश का कर्जदार है | और इस राष्ट्र की सेवा में मेरा पूरा जीवन समर्पित है| मेरे रक्त का एक कतरा सनातन धर्म की एकता और राष्ट्र के लिए समर्पित है|
"व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण" करना हमारा लक्ष्य हैं।
आज जब हमारा राष्ट्र विश्व पटल पर अपनी पहचान को हर क्षेत्र में और अधिक मजबूत बनाते जा रहा हैं, ऐसे में हम सभी का कर्तव्य है कि हम अपने अमूल्य योगदान और पुरषार्थ को बनाए रखें। भारत केवल एक भुभाग नहीं, हमारी आस्था, संस्कृति और गौरव का प्रतीक एवं केन्द्र है।
हमारी भारतीय नारायणी सेना का उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार नहीं है, बल्कि राष्ट्रप्रेमियों और राष्ट्रीयता के मुल्यों को जीवित रखना है,। हमें जाति, धर्म, भाषा और प्रांतवाद के भेदभाव से ऊपर उठकर के देश की सेवा में समर्पित होना होगा।
आज समय की मांग है कि हम भारत की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए न केवल शब्द कहें, बल्कि कर्मों में भी अपनी निष्ठा दर्शाएं। आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि किसी भी परिस्थिति में देश का गौरव, सम्मान और अखंडता पर विश्वास नहीं टूटने देगें ।
और मैं आप सभी से प्रार्थना करता हूं कि राष्ट्रप्रेमियों की भावना और अधिक प्रबल हो और हर उस चुनौती का सामना करे, जो हमारी एकता को तोड़ने का प्रयास करे।
भारतीय नारायणी सेना प्रमुख श्री शंम्भूनाथ सनातनी जी का मुख्य मंन्त्र "व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण" करना है। सबमें राष्ट्र निर्माण की भावना जागृत करना है।
"वंदे मातरम्! जय हिन्द"
श्रीशम्भूनाथ सनातनी
राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय नारायणी सेना
हमारा मॉडल (सेना = सेवा, ट्रस्ट = फंडिंग) स्पष्ट है। https://www.bhartiyanarayanisena.in/
? भारतीय नारायणी सेना
Standard Operating Procedure (SOP)
1. ? परिचय (Purpose)
भारतीय नारायणी सेना एक निःशुल्क, सेवा-आधारित संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज सेवा, जागरूकता और संगठन निर्माण है।
? यह संगठन किसी से कोई धन/फीस नहीं लेता
? सभी आर्थिक कार्य श्री राधेनारायणी सेवा ट्रस्ट के माध्यम से होते हैं
2. ? उद्देश्य (Objectives)
समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचाना
युवाओं में सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना
धर्म, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों का संरक्षण
जरूरतमंदों को सही माध्यम से सहायता दिलाना
3. ? संगठन संरचना (Organizational Structure)
स्तर (Levels)
राष्ट्रीय स्तर
राज्य स्तर
जिला स्तर
तहसील / शहर स्तर
ग्राम स्तर
प्रमुख पद
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (अधिकतम 4)
महासचिव
सचिव
कोष समन्वयक (केवल ट्रस्ट से समन्वय हेतु)
जिला/ब्लॉक अध्यक्ष
कार्यकर्ता / स्वयंसेवक
4. ? सदस्यता नियम (Membership Rules)
✅ सदस्यता पूर्णतः निःशुल्क होगी
✅ आयु 18+ (विशेष मामलों में युवा विंग अलग बन सकता है)
✅ राष्ट्र, समाज और संगठन के प्रति निष्ठा अनिवार्य
❌ कोई आपराधिक गतिविधि में संलिप्त व्यक्ति सदस्य नहीं बनेगा
5. ? कार्य क्षेत्र (Operational Areas)
5.1 सामाजिक सेवा
भोजन, कपड़ा, सहायता वितरण
गरीब और जरूरतमंदों की पहचान
5.2 स्वास्थ्य
ब्लड डोनेशन
मेडिकल कैम्प में सहयोग
5.3 शिक्षा
जरूरतमंद छात्रों को ट्रस्ट से जोड़ना
शिक्षा सहायता अभियान
5.4 धार्मिक कार्य
कार्यक्रम आयोजन
सांस्कृतिक संरक्षण
5.5 आपदा राहत
आपातकालीन सहायता
राहत कार्य
6. ⚙️ कार्य प्रणाली (Working System)
Step-by-Step Process:
समस्या की पहचान (Field Worker द्वारा)
रिपोर्ट बनाना (फोटो + विवरण)
वरिष्ठ अधिकारी को भेजना
ट्रस्ट को फॉरवर्ड करना
ट्रस्ट द्वारा सत्यापन और फंडिंग
सेना द्वारा सेवा कार्य निष्पादन
7. ? वित्तीय नियम (Financial Protocol)
❗ भारतीय नारायणी सेना:
कोई धन संग्रह नहीं करेगी
कोई दान नहीं लेगी
✅ श्री राधेनारायणी सेवा ट्रस्ट:
सभी दान/फंडिंग प्राप्त करेगा
बैंकिंग और ऑडिट करेगा
? सेना केवल सेवा कार्य करेगी, पैसा नहीं संभालेगी
8. ? आचार संहिता (Code of Conduct)
अनुशासन और मर्यादा बनाए रखें
किसी धर्म/जाति के खिलाफ टिप्पणी नहीं
संगठन की छवि खराब न करें
सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से पोस्ट करें
वरिष्ठों का सम्मान करें
9. ? प्रतिबंध (Restrictions)
बिना अनुमति कोई फंड इकट्ठा करना मना है
संगठन के नाम का निजी उपयोग वर्जित
राजनीतिक गतिविधियों में सीधे शामिल नहीं होना (जब तक नीति में स्पष्ट न हो)
10. ? पहचान प्रणाली (Identity System)
हर सदस्य को ID कार्ड दिया जाएगा
नियुक्ति पत्र जारी होगा
यूनिफॉर्म (यदि हो) निर्धारित की जा सकती है
11. ? रिपोर्टिंग सिस्टम (Reporting System)
साप्ताहिक रिपोर्ट (जिला स्तर)
मासिक रिपोर्ट (राज्य स्तर)
वार्षिक रिपोर्ट (राष्ट्रीय स्तर)
12. ? पुरस्कार एवं अनुशासन (Reward & Discipline)
पुरस्कार:
उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान
प्रमाण पत्र
अनुशासन:
चेतावनी
पद से हटाना
सदस्यता समाप्त
13. ? संशोधन (Amendment Policy)
SOP में बदलाव केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही किया जाएगा
लिखित स्वीकृति अनिवार्य होगी
14. ? ट्रस्ट के साथ समन्वय (Coordination with Trust)
हर आर्थिक आवश्यकता ट्रस्ट को भेजी जाएगी
ट्रस्ट की स्वीकृति के बाद ही कार्य होगा
पूर्ण पारदर्शिता रखी जाएगी
? निष्कर्ष
यह SOP भारतीय नारायणी सेना को एक अनुशासित, पारदर्शी और प्रभावी सेवा संगठन बनाता है, जहाँ
? सेवा = सेना
? संसाधन = ट्रस्ट
भारतीय नारायणी सेना
संविधान (Constitution)
प्रस्तावना (Preamble)
हम भारत के नागरिक, सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और मानव कल्याण के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए भारतीय नारायणी सेना नामक संगठन का गठन करते हैं।
यह संगठन समाज सेवा, धर्म रक्षा, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जागरूकता के लिए कार्य करेगा।
संगठन का संचालन इस संविधान, अनुशासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।
अध्याय 1 – संगठन का नाम
संगठन का नाम “भारतीय नारायणी सेना” (Bharatiya Narayani Sena) होगा।
अध्याय 2 – मुख्य कार्यालय
संगठन का राष्ट्रीय मुख्यालय भारत में होगा।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अनुमति से देश के विभिन्न राज्यों में कार्यालय स्थापित किए जा सकते हैं।
राज्य, जिला और तहसील स्तर पर भी कार्यालय बनाए जा सकते हैं।
अध्याय 3 – संगठन का उद्देश्य
भारतीय नारायणी सेना के मुख्य उद्देश्य:
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का संरक्षण एवं प्रचार करना।
समाज में राष्ट्रीय एकता और भाईचारा बढ़ाना।
गौ सेवा, पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक जागरूकता फैलाना।
गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना।
युवाओं को राष्ट्र सेवा और सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित करना।
शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कार के क्षेत्र में कार्य करना।
धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना।
समाज में अन्याय और अत्याचार के खिलाफ कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना।
अध्याय 4 – संगठन की संरचना
संगठन निम्न स्तरों पर कार्य करेगा:
राष्ट्रीय कार्यकारिणी
राज्य कार्यकारिणी
जिला कार्यकारिणी
तहसील / तालुका कार्यकारिणी
नगर / ग्राम समिति
प्रत्येक स्तर पर अध्यक्ष, सचिव और अन्य पदाधिकारी होंगे।
अध्याय 5 – राष्ट्रीय पदाधिकारी
राष्ट्रीय स्तर पर निम्न पद होंगे:
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (4)
राष्ट्रीय महासचिव
राष्ट्रीय सचिव (2)
राष्ट्रीय संगठन मंत्री
राष्ट्रीय प्रवक्ता
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी
राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष
राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष
राष्ट्रीय आईटी प्रभारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष:
श्री शम्भूनाथ सनातनी जी
अध्याय 6 – राज्य स्तर पदाधिकारी
हर राज्य में निम्न पद होंगे:
प्रदेश अध्यक्ष
प्रदेश उपाध्यक्ष
प्रदेश महासचिव
प्रदेश सचिव
प्रदेश संगठन मंत्री
प्रदेश कोषाध्यक्ष
प्रदेश मीडिया प्रभारी
अध्याय 7 – जिला स्तर पदाधिकारी
जिला स्तर पर:
जिला अध्यक्ष
जिला उपाध्यक्ष
जिला महासचिव
जिला सचिव
जिला संगठन मंत्री
जिला मीडिया प्रभारी
अध्याय 8 – सदस्यता
सदस्य बनने की शर्तें
व्यक्ति भारतीय नागरिक होना चाहिए।
सनातन संस्कृति और राष्ट्र सेवा में विश्वास होना चाहिए।
संगठन के नियमों का पालन करना होगा।
सदस्यता के प्रकार
सामान्य सदस्य
सक्रिय सदस्य
आजीवन सदस्य
अध्याय 9 – सदस्यता शुल्क
सदस्यता प्रकार
शुल्क
सामान्य सदस्य
₹100 वार्षिक
सक्रिय सदस्य
₹500 वार्षिक
आजीवन सदस्य
₹5000 एक बार
(शुल्क राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा बदला जा सकता है)
अध्याय 10 – पदाधिकारियों की जिम्मेदारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
संगठन का सर्वोच्च पद होगा।
संगठन की नीति तय करेगा।
महत्वपूर्ण निर्णयों की अंतिम स्वीकृति देगा।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्य संभालेंगे।
महासचिव
संगठन के प्रशासनिक कार्य देखेंगे।
बैठकों का संचालन करेंगे।
सचिव
संगठन के दस्तावेज और रिकॉर्ड संभालेंगे।
कोषाध्यक्ष
संगठन की आय-व्यय का हिसाब रखेंगे।
अध्याय 11 – बैठक
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक वर्ष में कम से कम दो बार होगी।
राज्य और जिला स्तर पर बैठक आवश्यकतानुसार होगी।
सभी निर्णय बहुमत से लिए जाएंगे।
अध्याय 12 – वित्त व्यवस्था
संगठन की आय के स्रोत:
सदस्यता शुल्क
दान और सहयोग राशि
सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम
ट्रस्ट या संस्थाओं से सहयोग
धन का उपयोग
समाज सेवा
संगठन विस्तार
धार्मिक कार्यक्रम
गरीबों की सहायता
प्रशासनिक खर्च
अध्याय 13 – धन वितरण प्रणाली
प्राप्त धन का वितरण इस प्रकार हो सकता है (मॉडल):
40% राष्ट्रीय संगठन
30% राज्य संगठन
20% जिला संगठन
10% स्थानीय कार्यक्रम
(यह व्यवस्था संगठन की आवश्यकता के अनुसार बदली जा सकती है)
अध्याय 14 – अनुशासन समिति
संगठन में अनुशासन बनाए रखने के लिए एक समिति बनाई जाएगी।
यदि कोई सदस्य:
संगठन के नियमों का उल्लंघन करे
संगठन की छवि खराब करे
अनुशासनहीनता करे
तो कार्रवाई हो सकती है:
चेतावनी
निलंबन
सदस्यता समाप्त
अध्याय 15 – संगठन का ध्वज
संगठन का ध्वज सनातन धर्म, साहस और सेवा भावना का प्रतीक होगा।
ध्वज और चिन्ह राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित किए जाएंगे।
अध्याय 16 – संगठन का नारा
“धर्म रक्षा – राष्ट्र रक्षा – समाज सेवा”
अध्याय 17 – सदस्य शपथ
“मैं भारतीय नारायणी सेना का सदस्य बनकर सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित रहने की शपथ लेता/लेती हूँ।
मैं संगठन के संविधान और अनुशासन का पालन करूंगा/करूंगी।”
अध्याय 18 – संविधान संशोधन
यदि भविष्य में संविधान में संशोधन आवश्यक हो तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में दो-तिहाई बहुमत से संशोधन किया जा सकता है।
भारतीय नारायणी सेना एक सामाजिक राष्ट्रवादी संगठन है, जिसका उद्देश्य सनातन धर्म की रक्षा और वैभवशाली राष्ट्र का निर्माण करना है।
भारतीय नारायणी सेना संगठन श्रीराधेनारायणीसेवा ट्रस्ट परिवार द्वारा संरक्षित है और पूरे भारत में सनातनी भाई-बहनों की सुरक्षा और राष्ट्रीय जागरूकता के लिए समर्पित हैं।
संगठन का उद्देश्य:1
संरचना: संरचना
भारतीय नारायणी सेना की संरचना क्रमशः ग्राम, ब्लॉक, तहसील, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर साझीदारी की जाती है। प्रत्येक संरचना में निम्नलिखित पदाधिकारी प्रभार सामिल होते हैं:
संगठन की संरचना के प्रकार:
संगठन में सदस्यता चार प्रकार की होती है:
विशेष अनुरोध:
भारतीय नारायणी सेना के सभी संगठन सदस्यों से अनुरोध है कि वे जाति-पंथी, ऊंच-नीच, छुवाछूत आदि जैसी कुरितियों को एकजुट होकर समाज से वहिष्कार करें। और संगठन के सदस्य हिंदू धर्म एवं सनातनी एकता की रक्षा में सहयोग करें। प्रत्येक हिंदू परिवार से कम से कम एक सदस्य को संगठन से जुड़ने के लिए आवेदन किया जाता है।
अधिक जानकारी और सदस्यता के लिए, आप संगठन की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
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# श्री शंम्भुनाथ सनातनी जीवन परिचय
{{Infobox person
| name = श्री शंम्भुनाथ सनातनी
| image =
| caption = भारतीय नारायणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक
| birth_date = {{Birth date and age|1982|01|01}}
| birth_place = सदर अस्पताल, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत
| residence = अंकलेश्वर, जिला भरुच, गुजरात
| nationality = भारतीय
| occupation = समाजसेवी, संगठनकर्ता
| known_for = भारतीय नारायणी सेना की स्थापना
| title = राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक – भारतीय नारायणी सेना
| parents = पिता – श्री सालिकरामनाथ यादव
माता – श्रीमती निर्मला देवी
}}
**श्री शंम्भुनाथ सनातनी** (जन्म 01 जनवरी 1982) एक भारतीय समाजसेवी, राष्ट्रवादी विचारक और **भारतीय नारायणी सेना** के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
वे समाज में समानता, धर्म रक्षा और युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करने हेतु विभिन्न अभियानों का संचालन करते हैं।
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## प्रारम्भिक जीवन
श्री शंम्भुनाथ सनातनी जी का जन्म उत्तर प्रदेश के **सदर अस्पताल, आजमगढ़** में हुआ।
उनका पैतृक गाँव डिघवनिया मझौवा, ब्लॉक अजमतगढ़, जिला आजमगढ़ में स्थित है।
छोटी उम्र में ही वे अपने माता-पिता के साथ गुजरात के **भरुच जिले के तालुका अंकलेश्वर** में बस गए।
यहीं उनका पालन-पोषण हुआ और शिक्षा प्राप्त हुई।
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## शिक्षा एवं व्यक्तित्व निर्माण
अंकलेश्वर में पढ़ाई के दौरान ही उनमें समाजसेवा, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति की गहरी भावना विकसित हुई।
वे बचपन से ही अन्याय के विरोध में खड़े होने वाले और संगठन क्षमता से युक्त थे।
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## संगठन निर्माण
श्री शंम्भुनाथ सनातनी जी ने समाज में बढ़ते अन्याय और सनातन संस्कृति पर हो रहे हमलों को देखते हुए **भारतीय नारायणी सेना** की स्थापना की।
### संगठन के उद्देश्य
- सनातन धर्म की रक्षा एवं प्रसार
- समाज में समानता और भाईचारे का प्रचार
- युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित करना
- गरीब, वंचित और जरूरतमंदों की मदद
- स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत अभियान को प्रोत्साहन
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## सामाजिक योगदान
- गौसंरक्षण और धर्मरक्षा अभियानों का आयोजन
- प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता अभियान
- नशामुक्ति एवं युवा जागरूकता कार्यक्रम
- सामाजिक रैलियों और सहायता शिविरों का सफल संचालन
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## विचारधारा
श्री शंम्भुनाथ सनातनी जी का जीवन मंत्र है – **"मजबूत संगठन, मजबूत राष्ट्र।"**
वे मानते हैं कि समाज की एकता ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है।
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## References
1. [भारतीय नारायणी सेना – आधिकारिक वेबसाइट](http://www.bhartiyanarayanisena.in)
2. संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्तियाँ और सोशल मीडिया पोस्ट
3. व्यक्तिगत जीवन और भाषणों से प्राप्त जानकारी
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## Categories
- [[Category:भारतीय समाजसेवी]]
- [[Category:भारतीय राष्ट्रवादी]]
- [[Category:उत्तर प्रदेश के लोग]]
- [[Category:गुजरात के लोग]]
- [[Category:1982 में जन्मे लोग]]
- [[Category:भारतीय संगठनकर्ता]]
श्री शंम्भुनाथ सनातनी जी
(राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक – भारतीय नारायणी सेना)
प्रारंभिक जीवन
श्री शंम्भुनाथ सनातनी जी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। बचपन से ही उनमें धार्मिकता, राष्ट्रभक्ति और समाजसेवा की गहरी भावना थी। शिक्षा प्राप्ति के साथ-साथ वे भारतीय संस्कृति, परंपरा और सनातन धर्म के मूल्यों से गहराई से जुड़ते गए।
समाज सेवा का आरंभ
युवा अवस्था से ही उन्होंने समाज के कमजोर, शोषित और वंचित वर्ग की सेवा को अपना ध्येय बना लिया। समाज में व्याप्त कुरीतियों, भेदभाव और अन्याय के विरुद्ध उन्होंने निरंतर संघर्ष किया।
भारतीय नारायणी सेना की स्थापना
समाज और राष्ट्रहित में संगठित शक्ति की आवश्यकता को देखते हुए श्री शंम्भुनाथ सनातनी जी ने भारतीय नारायणी सेना की स्थापना की। इस संगठन का उद्देश्य—
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा,
युवाओं को राष्ट्र सेवा की ओर प्रेरित करना,
समाज में भाईचारा और संगठन की भावना जगाना,
धर्म, शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में जनजागृति फैलाना है।
नेतृत्व क्षमता
शंम्भुनाथ सनातनी जी के नेतृत्व में भारतीय नारायणी सेना आज देशभर में तेजी से बढ़ रही है। उनकी स्पष्ट विचारधारा, निडर नेतृत्व और समाजहित की दृढ़ निष्ठा उन्हें एक सशक्त और प्रेरणादायी व्यक्तित्व बनाती है।
आदर्श और विचारधारा
“राष्ट्र सर्वोपरि” उनका मूल मंत्र है।
वे मानते हैं कि जब तक समाज संगठित और जागरूक नहीं होगा, तब तक सशक्त भारत का निर्माण संभव नहीं है।
धर्म और संस्कृति की रक्षा के साथ-साथ वे सामाजिक एकता और युवाओं के जागरण को सबसे आवश्यक मानते हैं।
वर्तमान भूमिका
आज श्री शंम्भुनाथ सनातनी जी भारतीय नारायणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में देश के विभिन्न राज्यों में संगठन का विस्तार कर रहे हैं। वे समाज और राष्ट्र के लिए हर समय समर्पित रहते हैं और नई पीढ़ी को एक सशक्त, संगठित और संस्कारित भारत की राह दिखा रहे हैं।
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