भारतीय नारायणी सेना के बारे में
भारतीय नारायणी सेना : स्थापना की आवश्यकता और उद्देश्य
आज के बदलते राष्ट्रीय परिदृश्य में जब समाज अनेक प्रकार की वैचारिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब एक संगठित, जागरूक और राष्ट्रनिष्ठ शक्ति की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय नारायणी सेना की स्थापना का संकल्प लिया गया।
भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को सशक्त बनाने के उद्देश्य से संगठन का गठन किया गया। समाज में बढ़ती वैचारिक भ्रम की स्थिति, युवाओं में दिशा के अभाव, तथा राष्ट्रहित के मुद्दों पर संगठित आवाज़ की आवश्यकता ने इस संगठन की नींव को मजबूत किया।
संगठन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष शम्भूनाथ सनातनी जी ने यह अनुभव किया कि राष्ट्र और धर्म के प्रति समर्पित युवाशक्ति को एक मंच पर लाकर सकारात्मक, रचनात्मक और सेवा आधारित कार्यों में लगाया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से भारतीय नारायणी सेना की स्थापना की गई — ताकि समाज में राष्ट्रभक्ति, संस्कार, सेवा और संगठन की भावना को सुदृढ़ किया जा सके।
भारतीय नारायणी सेना केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक विचारधारा है —
जो राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वोपरि मानती है।
जो भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाने का संकल्प रखती है।
जो युवाओं को जागरूक, अनुशासित और राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरित करती है।
आज भारतीय नारायणी सेना समाज में सेवा, जागरण और संगठन के माध्यम से एक सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में कार्यरत है। यह संगठन उन सभी राष्ट्रप्रेमी नागरिकों का मंच है, जो भारत को सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से सशक्त देखना चाहते हैं।
“संगठन में शक्ति है, सेवा में समर्पण है, और राष्ट्र में हमारी पहचान है।”
सनातनो की रक्षा - देश की रक्षा
श्री कृष्ण की सेना - विजय या वीरगति
मेरे प्यारे भारतवासी सनातनी भाई बन्धु!
जय श्री राधे
भारतीय नारायणी सेना श्रीराधेनारायणी सेवा ट्रस्ट परिवार का स्वयं सेवक लोगों का समूह है। जो सभी के बीच हमारे सनातनी भाईयों एवं समर्थकों की रक्षा के संकल्प के साथ सनातनियों की शक्ति के रूप में पूरे देश में बहुत तेज गति से बढ़ रही है | पूरे देश से संगठन की जानकारी की मांग बढ़ रही है | इसके साथ ही एक प्रश्न यह भी है कि कुछ लोगों के मन में जागृति का होना स्वाभाविक है कि इतना तो संघठन है फिर आप क्यों?
आप सभी सनातनी प्रेमीयों को भारतीय नारायणी सेना जागरुकता अभियान के तहत यह जानकारी बताने का उद्देश्य यह है कि तथाकथित सैकुलर नेताओं ने 1947 से अब तक अधिकांश समय सत्ता कब्जा करके सनातनियों के खिलाफ षडयंत्र के तहत सनातनियों को अपमानित किया, अत्याचार किया व सनातनी कैसे समाप्त हो इस षडयंत्र में लगे रहते है । विश्व में भारत ही एक ऐसा हिन्दू राष्ट्र है जिसमें हिन्दुओं का सर्वाधिक उत्पीडन किया जाता है। और हिन्दुओं को ही तथा कथित सैकुलर नेताओं द्वारा सदभव, समरस्ता, सहनशीलता का उपदेश दिया जाता है । और अपराधी के रुप में हिन्दुओं को कटघरे में खडा किया जाता है ।
भारत के बुध्दीजीवीओं ने हिन्दुओं की समस्याओं का समाधान दूढने के क्रम में पाया कि हिन्दुओं का सतत् जागरण हो, इसके लिये बिना राजनैतिक प्रभाव व दबाव के हिन्दू शक्ति खडी हो । इस क्रम में हिन्दुओं के जगाने के प्रयास में कुछ संस्थाये काम करती है । वह प्रेक्षक या अप्रत्यक्ष रुप से राजनेताओं के दबाव व प्रभाव में होने के कारण हिन्दू हित में निर्णायक काम कराने में सफल नहीं हो पाती । हिन्दू वोट बैंक तो उभरा है लेकिन हिंदू हित में काम करने का अभाव दूर-दूर तक दिखाई देता है | ऐसी विषम परिस्थिति में हिन्दू हित के लिये काम कराने वाला संगठन एक चुनौती दिखाई देता है, इस भयंकर चुनौती को स्वीकार करने का साहस संपूर्ण जीवन हिन्दुओं के लिये समर्पित एक-संन्यासी योद्धा के हृदय में वेदना के रूप में प्रकट हुआ तो इस संन्यासी द्वारा अनेकों वर्षो से देश के हिन्दू हित चिंतक प्रमुख बुध्दीजीवीओं से वार्ता के निष्कर्ष के बाद तय हुआ केवल हिंदू हित के लिये कार्य करने वाला संगठन होना चाहिये, जो राजनीती और राजनेताओं के दबाव तथा प्रभाव में ना आये |
भारतीय नारायणी सेना मुख्य संकल्प
१- समाजिक समरसता
भारतीय नारायणी सेना के अनुसार, सामाजिक समरसता का अर्थ समाज में सभी वर्गों, जातियों, धर्मों और समुदायों के बीच समानता, सद्भाव, और एकता स्थापित करना है। यह केवल सामाजिक न्याय का विचार नहीं, बल्कि एक राष्ट्रवादी सिद्धांत है, जो भारत को अखंड, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होता है।
भारतीय नारायणी सेना द्वारा परिभाषित सामाजिक समरसता:
1. "वसुधैव कुटुंबकम्" की भावना – संपूर्ण समाज को एक परिवार मानकर, बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार करना।
2. जाति और वर्गभेद से मुक्त समाज – जाति, धर्म, भाषा और प्रांत के आधार पर भेदभाव खत्म कर, राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देना।
3. सामाजिक न्याय और समान अवसर – हर नागरिक को शिक्षा, रोजगार और सम्मान का समान अधिकार देना।
4. राष्ट्रधर्म सर्वोपरि – व्यक्ति का पहला कर्तव्य राष्ट्र के प्रति हो, न कि संकीर्ण जातिगत या धार्मिक पहचानों के प्रति।
5. ग्राम और शहरी भारत का संतुलित विकास – शहरों और गांवों के बीच समान अवसर पैदा कर, ग्रामीण भारत को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाना।
6. नारी सम्मान और सशक्तिकरण – महिलाओं को समाज में समान अधिकार, सुरक्षा और सम्मान देना।
7. सेवा भाव और परोपकार – गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों की सहायता करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाना।
8. धार्मिक समरसता – सभी सनातनीयों के आस्था का सम्मान करते हुए, राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना।
9. सांस्कृतिक एकता – भारतीय संस्कृति की विविधता को अपनाते हुए, एकता को बनाए रखना।
10. युवा शक्ति का राष्ट्र निर्माण में योगदान – युवाओं को राष्ट्रवादी और सेवा भाव से प्रेरित कर, समाज सुधार में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना।
भारतीय नारायणी सेना के अनुसार, सामाजिक समरसता का अर्थ केवल समानता नहीं, बल्कि "राष्ट्र की एकता और अखंडता" की भावना को मजबूत करना है। जब समाज में कोई भेदभाव न हो और हर नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करे, तभी भारत एक शक्तिशाली और आत्मनिर्भर राष्ट्र बन सकता है।
२- पर्यावरण
भारतीय नारायणी सेना के अनुसार, पर्यावरण केवल प्रकृति का भौतिक स्वरूप नहीं है, बल्कि यह जीव, समाज और राष्ट्र की समृद्धि का आधार है। पर्यावरण की रक्षा करना केवल वैज्ञानिक या कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि यह एक राष्ट्रधर्म और सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है।
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भारतीय नारायणी सेना द्वारा परिभाषित पर्यावरण:
1. पंचमहाभूतों का संतुलन – पर्यावरण पृथ्वी (भूमि), जल (नदियाँ, समुद्र), अग्नि (ऊर्जा), वायु (वातावरण), और आकाश (खगोलीय प्रभाव) से मिलकर बना है। इनका संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
2. प्रकृति के प्रति सम्मान – भारतीय संस्कृति में नदियों, वृक्षों, पर्वतों और वन्यजीवों को पूजनीय माना गया है। यह दर्शाता है कि पर्यावरण केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है।
3. स्वदेशी और पारंपरिक पर्यावरण संरक्षण – प्राचीन भारतीय विधियों, जैविक खेती, गो-आधारित कृषि, जल संचयन आदि को पुनर्जीवित करना।
4. हरित विकास (Sustainable Development) – आधुनिक विकास के साथ-साथ प्रकृति का संतुलन बनाए रखना, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रहें।
5. जल, वायु और भूमि का संरक्षण – स्वच्छ जल का संचय, वायु प्रदूषण की रोकथाम और भूमि को उपजाऊ बनाए रखना राष्ट्र की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
6. स्वच्छ भारत, समृद्ध भारत – पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाना और नागरिकों को कर्तव्यनिष्ठ बनाकर स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित करना।
7. वन और जैव विविधता संरक्षण – वृक्षारोपण, वन्यजीवों की रक्षा और प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करना।
8. ऊर्जा संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग – सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जलविद्युत को बढ़ावा देकर प्रदूषण मुक्त भारत बनाना।
निष्कर्ष:
भारतीय नारायणी सेना पर्यावरण को केवल भौतिक संसाधन नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज की आत्मा मानती है। इसका संरक्षण हर नागरिक का कर्तव्य है, ताकि भारत को "विश्वगुरु" बनाने के साथ-साथ "पर्यावरण गुरु" भी बनाया जा सके।
भारतीय नारायणी सेना के अनुसार, नागरिक कर्तव्य केवल संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह समाज और देश के प्रति हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी होती है, जो राष्ट्र की समृद्धि, अखंडता और विकास में सहायक होती है।
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भारतीय नारायणी सेना द्वारा परिभाषित नागरिक कर्तव्य:
1. राष्ट्र प्रथम का सिद्धांत – अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर देशहित को सर्वोपरि रखना।
2. संविधान और कानूनों का पालन – भारत के संविधान, राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान और कानूनी व्यवस्थाओं का सम्मान करना।
3. स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना – स्वदेशी उत्पादों को अपनाना और भारतीय उद्योगों को सहयोग देना।
4. समाज सेवा और परोपकार – वंचित वर्गों की सहायता करना, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता में योगदान देना।
5. राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा – जाति, धर्म, भाषा और प्रांत के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाना।
6. पर्यावरण संरक्षण – प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग करना, जल, वायु और भूमि को स्वच्छ रखना।
7. कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी – अपने कार्यक्षेत्र में निष्ठा से कार्य करना और भ्रष्टाचार से दूर रहना।
8. स्वास्थ्य और स्वच्छता का पालन – व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना एवं स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली अपनाना।
9. सुरक्षा और सेवा भावना – देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा में योगदान देना एवं संकट के समय नागरिकों की रक्षा में सहयोग करना।
10. युवा सशक्तिकरण और शिक्षा – नई पीढ़ी को राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ना और नैतिक शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
भारतीय नारायणी सेना के अनुसार, नागरिक कर्तव्य केवल अधिकारों का संतुलन नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय के लिए एक साधना है, जिससे राष्ट्र उन्नति के पथ पर अग्रसर हो सके।
३- नागरिक कर्तव्य
भारतीय नारायणी सेना के अनुसार, नागरिक कर्तव्य केवल संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह समाज और देश के प्रति हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी होती है, जो राष्ट्र की समृद्धि, अखंडता और विकास में सहायक होती है।
भारतीय नारायणी सेना द्वारा परिभाषित नागरिक कर्तव्य:
1. राष्ट्र प्रथम का सिद्धांत – अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर देशहित को सर्वोपरि रखना।
2. संविधान और कानूनों का पालन – भारत के संविधान, राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान और कानूनी व्यवस्थाओं का सम्मान करना।
3. स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना – स्वदेशी उत्पादों को अपनाना और भारतीय उद्योगों को सहयोग देना।
4. समाज सेवा और परोपकार – वंचित वर्गों की सहायता करना, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता में योगदान देना।
5. राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा – जाति, धर्म, भाषा और प्रांत के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाना।
6. पर्यावरण संरक्षण – प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग करना, जल, वायु और भूमि को स्वच्छ रखना।
7. कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी – अपने कार्यक्षेत्र में निष्ठा से कार्य करना और भ्रष्टाचार से दूर रहना।
8. स्वास्थ्य और स्वच्छता का पालन – व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना एवं स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली अपनाना।
9. सुरक्षा और सेवा भावना – देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा में योगदान देना एवं संकट के समय नागरिकों की रक्षा में सहयोग करना।
10. युवा सशक्तिकरण और शिक्षा – नई पीढ़ी को राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ना और नैतिक शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
भारतीय नारायणी सेना के अनुसार, नागरिक कर्तव्य केवल अधिकारों का संतुलन नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय के लिए एक साधना है, जिससे राष्ट्र उन्नति के पथ पर अग्रसर हो सके।
४- स्वदेशी https://www.bhartiyanarayanisena.in/
भारतीय नारायणी सेना के अनुसार, स्वदेशी का अर्थ उस विचारधारा से है जो आत्मनिर्भरता, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग, और भारतीय संसाधनों, उद्योगों तथा परंपराओं को प्राथमिकता देने पर बल देती है। यह केवल आर्थिक पहलू तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से भी स्वावलंबन को बढ़ावा देता है।
स्वदेशी का मूल उद्देश्य: https://www.bhartiyanarayanisena.in/
1. आर्थिक स्वतंत्रता – विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम कर भारतीय उद्योगों को बढ़ावा देना।
2. सांस्कृतिक संरक्षण – भारतीय मूल्यों, परंपराओं और शिल्प को पुनर्जीवित करना।
3. स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन – कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, कृषि और घरेलू व्यवसायों को बढ़ावा देना।
4. राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भरता – ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को अपनाकर आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर होना।
भारतीय नारायणी सेना इस विचार को राष्ट्रवाद, समाज सेवा और स्वदेशी आंदोलन के एक हिस्से के रूप में देखती है, जिसका उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर और गौरवशाली बनाना है।
५- कुटुंम्ब प्रबोधन
कुटुंब प्रबोधन का अर्थ है परिवार में संस्कार, संस्कृति, और नैतिक मूल्यों का संवर्धन करना। भारतीय नारायणी सेना इसे राष्ट्र निर्माण की आधारशिला मानती है, क्योंकि एक सशक्त और संस्कारित परिवार ही एक सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।
भारतीय नारायणी सेना के अनुसार कुटुंब प्रबोधन के मुख्य उद्देश्य:
1. संस्कारों का संवर्धन – परिवार में बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ना।
2. संवाद और एकता – परिवार के सदस्यों के बीच संवाद को बढ़ावा देकर पारिवारिक एकता को मजबूत करना।
3. आध्यात्मिकता और धर्म – सनातन धर्म की शिक्षा को परिवार स्तर पर पुनर्जीवित करना और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
4. नारी सम्मान और सशक्तिकरण – परिवार में महिलाओं के सम्मान, उनके अधिकारों और सशक्तिकरण पर ध्यान देना।
5. नशा मुक्ति और सदाचार – परिवार को नशा मुक्त, नैतिक और अनुशासित वातावरण प्रदान करना।
6. आर्थिक स्वावलंबन – स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने के लिए परिवार को प्रेरित करना।
7. संयुक्त परिवार व्यवस्था का समर्थन – भारतीय पारंपरिक संयुक्त परिवार व्यवस्था को पुनः जाग्रत कर समाज को मजबूत बनाना।
भारतीय नारायणी सेना की पहल:
भारतीय नारायणी सेना "कुटुंब प्रबोधन अभियान" के तहत परिवारिक संवाद शिविर, संस्कार कार्यशालाएँ, और धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन करती है, ताकि समाज में पारिवारिक मूल्यों को पुनर्जीवित किया जा सके।
इन्हीं संकल्प पर चल कर देश सेवा कार्य करने का संकल्प लेते हैं।
विशेष जानकारी :
भारतीय नारायणी सेना के विस्तार के लिये एक नियमावली बनाई गई है जिसका सामाजिक एवं धार्मिक संगठन ( गैर राजनैतिक संगठन ) के रुप में कराया गया है । उसी के अनुसार, भारतीय नारायणी सेना सेना के प्रमुख उददेश्य : संकल्प, संरक्षण, संवर्धन करना । हिन्दुओं के मठ मंदिरो कि रक्षा करना एवं जीर्णोद्धार करना । हिन्दूमान बिन्दुओं की रक्षा करना । संतो व गायों की रक्षा करना आदि ।
भारतीय नारायणी सेना
संविधान (Constitution)
प्रस्तावना (Preamble)
हम भारत के नागरिक, सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और मानव कल्याण के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए भारतीय नारायणी सेना नामक संगठन का गठन करते हैं।
यह संगठन समाज सेवा, धर्म रक्षा, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जागरूकता के लिए कार्य करेगा।
संगठन का संचालन इस संविधान, अनुशासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।
अध्याय 1 – संगठन का नाम
संगठन का नाम “भारतीय नारायणी सेना” (Bharatiya Narayani Sena) होगा।
अध्याय 2 – मुख्य कार्यालय
संगठन का राष्ट्रीय मुख्यालय भारत में होगा।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अनुमति से देश के विभिन्न राज्यों में कार्यालय स्थापित किए जा सकते हैं।
राज्य, जिला और तहसील स्तर पर भी कार्यालय बनाए जा सकते हैं।
अध्याय 3 – संगठन का उद्देश्य
भारतीय नारायणी सेना के मुख्य उद्देश्य:
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का संरक्षण एवं प्रचार करना।
समाज में राष्ट्रीय एकता और भाईचारा बढ़ाना।
गौ सेवा, पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक जागरूकता फैलाना।
गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना।
युवाओं को राष्ट्र सेवा और सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित करना।
शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कार के क्षेत्र में कार्य करना।
धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना।
समाज में अन्याय और अत्याचार के खिलाफ कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना।
अध्याय 4 – संगठन की संरचना
संगठन निम्न स्तरों पर कार्य करेगा:
राष्ट्रीय कार्यकारिणी
राज्य कार्यकारिणी
जिला कार्यकारिणी
तहसील / तालुका कार्यकारिणी
नगर / ग्राम समिति
प्रत्येक स्तर पर अध्यक्ष, सचिव और अन्य पदाधिकारी होंगे।
अध्याय 5 – राष्ट्रीय पदाधिकारी
राष्ट्रीय स्तर पर निम्न पद होंगे:
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (4)
राष्ट्रीय महासचिव
राष्ट्रीय सचिव (2)
राष्ट्रीय संगठन मंत्री
राष्ट्रीय प्रवक्ता
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी
राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष
राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष
राष्ट्रीय आईटी प्रभारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष:
श्री शम्भूनाथ सनातनी जी
अध्याय 6 – राज्य स्तर पदाधिकारी
हर राज्य में निम्न पद होंगे:
प्रदेश अध्यक्ष
प्रदेश उपाध्यक्ष
प्रदेश महासचिव
प्रदेश सचिव
प्रदेश संगठन मंत्री
प्रदेश कोषाध्यक्ष
प्रदेश मीडिया प्रभारी
अध्याय 7 – जिला स्तर पदाधिकारी
जिला स्तर पर:
जिला अध्यक्ष
जिला उपाध्यक्ष
जिला महासचिव
जिला सचिव
जिला संगठन मंत्री
जिला मीडिया प्रभारी
अध्याय 8 – सदस्यता
सदस्य बनने की शर्तें
व्यक्ति भारतीय नागरिक होना चाहिए।
सनातन संस्कृति और राष्ट्र सेवा में विश्वास होना चाहिए।
संगठन के नियमों का पालन करना होगा।
सदस्यता के प्रकार
सामान्य सदस्य
सक्रिय सदस्य
आजीवन सदस्य
अध्याय 9 – सदस्यता शुल्क
सदस्यता प्रकार
शुल्क
सामान्य सदस्य
₹100 वार्षिक
सक्रिय सदस्य
₹500 वार्षिक
आजीवन सदस्य
₹5000 एक बार
(शुल्क राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा बदला जा सकता है)
अध्याय 10 – पदाधिकारियों की जिम्मेदारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
संगठन का सर्वोच्च पद होगा।
संगठन की नीति तय करेगा।
महत्वपूर्ण निर्णयों की अंतिम स्वीकृति देगा।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्य संभालेंगे।
महासचिव
संगठन के प्रशासनिक कार्य देखेंगे।
बैठकों का संचालन करेंगे।
सचिव
संगठन के दस्तावेज और रिकॉर्ड संभालेंगे।
कोषाध्यक्ष
संगठन की आय-व्यय का हिसाब रखेंगे।
अध्याय 11 – बैठक
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक वर्ष में कम से कम दो बार होगी।
राज्य और जिला स्तर पर बैठक आवश्यकतानुसार होगी।
सभी निर्णय बहुमत से लिए जाएंगे।
अध्याय 12 – वित्त व्यवस्था
संगठन की आय के स्रोत:
सदस्यता शुल्क
दान और सहयोग राशि
सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम
ट्रस्ट या संस्थाओं से सहयोग
धन का उपयोग
समाज सेवा
संगठन विस्तार
धार्मिक कार्यक्रम
गरीबों की सहायता
प्रशासनिक खर्च
अध्याय 13 – धन वितरण प्रणाली
प्राप्त धन का वितरण इस प्रकार हो सकता है (मॉडल):
40% राष्ट्रीय संगठन
30% राज्य संगठन
20% जिला संगठन
10% स्थानीय कार्यक्रम
(यह व्यवस्था संगठन की आवश्यकता के अनुसार बदली जा सकती है)
अध्याय 14 – अनुशासन समिति
संगठन में अनुशासन बनाए रखने के लिए एक समिति बनाई जाएगी।
यदि कोई सदस्य:
संगठन के नियमों का उल्लंघन करे
संगठन की छवि खराब करे
अनुशासनहीनता करे
तो कार्रवाई हो सकती है:
चेतावनी
निलंबन
सदस्यता समाप्त
अध्याय 15 – संगठन का ध्वज
संगठन का ध्वज सनातन धर्म, साहस और सेवा भावना का प्रतीक होगा।
ध्वज और चिन्ह राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित किए जाएंगे।
अध्याय 16 – संगठन का नारा
“धर्म रक्षा – राष्ट्र रक्षा – समाज सेवा”
अध्याय 17 – सदस्य शपथ
“मैं भारतीय नारायणी सेना का सदस्य बनकर सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित रहने की शपथ लेता/लेती हूँ।
मैं संगठन के संविधान और अनुशासन का पालन करूंगा/करूंगी।”
अध्याय 18 – संविधान संशोधन
यदि भविष्य में संविधान में संशोधन आवश्यक हो तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में दो-तिहाई बहुमत से संशोधन किया जा सकता है।
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पद संरचना, संख्या और कार्य प्रणाली
1. राष्ट्रीय स्तर (National Level)
राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की सर्वोच्च कार्यकारिणी होती है।
पद और संख्या
* राष्ट्रीय अध्यक्ष – 1
* राष्ट्रीय उपाध्यक्ष – 5
* राष्ट्रीय महासचिव – 1
* राष्ट्रीय सचिव – 5
* राष्ट्रीय संगठन मंत्री – 1
राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री – 2
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष – 1
राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष – 1
राष्ट्रीय प्रवक्ता – 2
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी – 2
राष्ट्रीय आईटी प्रभारी – 2
राष्ट्रीय प्रचार मंत्री – 2
राष्ट्रीय सलाहकार मंडल – 7 से 11 सदस्य
2. राष्ट्रीय अध्यक्ष की कार्य प्रणाली
राष्ट्रीय अध्यक्ष (श्री शम्भूनाथ सनातनी जी) संगठन के सर्वोच्च पदाधिकारी होंगे।
मुख्य कार्य
संगठन की नीतियाँ तय करना
राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन करना
राज्य अध्यक्षों की नियुक्ति करना
महत्वपूर्ण निर्णय लेना
राष्ट्रीय बैठकों की अध्यक्षता करना
संगठन की दिशा और रणनीति तय करना
3. राष्ट्रीय महासचिव
मुख्य जिम्मेदारी
पूरे संगठन के प्रशासनिक कार्य देखना
बैठकों का आयोजन करना
सभी राज्यों से रिपोर्ट लेना
संगठन के आदेश जारी करना
4. राष्ट्रीय संगठन मंत्री
मुख्य कार्य
संगठन का विस्तार करना
नए सदस्य बनाना
राज्य, जिला और तहसील इकाइयों का गठन करना
5. राज्य स्तर (State Level)
प्रत्येक राज्य में अलग कार्यकारिणी होगी।
पद और संख्या
प्रदेश अध्यक्ष – 1
प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष – 1
प्रदेश उपाध्यक्ष – 3 से 5
प्रदेश महासचिव – 1
प्रदेश सचिव – 3
प्रदेश संगठन मंत्री – 1
प्रदेश सह-संगठन मंत्री – 2
प्रदेश कोषाध्यक्ष – 1
प्रदेश मीडिया प्रभारी – 1
प्रदेश आईटी प्रभारी – 1
6. जिला स्तर (District Level)
पद
जिला अध्यक्ष – 1
जिला उपाध्यक्ष – 2
जिला महासचिव – 1
जिला सचिव – 2
जिला संगठन मंत्री – 1
जिला कोषाध्यक्ष – 1
जिला मीडिया प्रभारी – 1
7. तहसील / तालुका स्तर
पद
तहसील अध्यक्ष – 1
तहसील उपाध्यक्ष – 2
तहसील सचिव – 1
तहसील संगठन मंत्री – 1
तहसील कोषाध्यक्ष – 1
8. नगर / ग्राम स्तर
पद
नगर / ग्राम अध्यक्ष – 1
उपाध्यक्ष – 1
सचिव – 1
संगठन मंत्री – 1
कोषाध्यक्ष – 1
संगठन कैसे संचालित होगा
1. सदस्यता प्रणाली
संगठन में सदस्य बनने के लिए:
सदस्यता फॉर्म भरना होगा
सदस्यता शुल्क देना होगा
संगठन के नियमों को मानना होगा
सदस्यता प्रकार
साधारण सदस्य
सक्रिय सदस्य
आजीवन सदस्य
संरक्षक सदस्य
2. बैठक प्रणाली
राष्ट्रीय बैठक
वर्ष में कम से कम 1 बार होगी
राज्य बैठक
हर 6 महीने में
जिला बैठक
हर 3 महीने में
3. निर्णय लेने की प्रक्रिया
महत्वपूर्ण निर्णय राष्ट्रीय कार्यकारिणी लेगी
राज्य स्तर के निर्णय प्रदेश कार्यकारिणी लेगी
स्थानीय निर्णय जिला और तहसील इकाई ले सकती है
4. वित्त प्रणाली
संगठन की आय के स्रोत:
दान
समाज सेवा कार्यक्रम
ट्रस्ट या संस्था का सहयोग
बैंक संचालन
बैंक खाता कोषाध्यक्ष और अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से चलेगा।
5. अनुशासन नियम
यदि कोई सदस्य:
संगठन विरोधी कार्य करे
समाज में विवाद फैलाए
संगठन की छवि खराब करे
तो उसके खिलाफ निलंबन या निष्कासन की कार्रवाई हो सकती है।
6. विशेष समितियाँ
संगठन में अलग-अलग समितियाँ भी बनाई जा सकती हैं:
युवा मोर्चा
महिला मोर्चा
कानूनी प्रकोष्ठ
आईटी सेल
मीडिया सेल
धर्म रक्षा समिति
कार्यकारिणी गठन : https://www.bhartiyanarayanisena.in/
सनातनीयों की सेना – भारतीय नारायणी सेना
विशेष निवेदन :
सभी हिन्दूओं से एक निवेदन है कि हिन्दूओं का अस्तित्व बचाने के लिये, अपने घर परिवार से समय निकालकर भारतीय नारायणी सेना में काम करें क्योकि हिन्दू बचेगा तभी देश बचेगा । सभी हिन्दूओं को जति-पांति, उंच-नीच, छुआछुत, भेदभाव, छोटा-बडा आदि कुरीतियों का भाव छोड़कर अर्थात ( हिन्दू-हिन्दू भाई-भाई ) आपस में मिलकर एक-दूसरे में हिन्दूत्व का भाव जागृत कर भारतीय नारायणी सेना के सदस्य बनकर कार्य करें । हर हिन्दू परिवार से कम से कम एक हिन्दू-हिन्दू रक्षक (सदस्य) बन कर भारतीय नारायणी सेना का राष्ट्रीय एवं ईश्वरीय कार्य में सहयोगी बनें, ईश्वर सदा आप पर कृपा करें ।
जय श्री राधे -जय श्री राम
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भारतीय नारायणी सेना या कोई भी सामाजिक संगठन यदि देश को मजबूत बनाना चाहता है, तो उसे निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्य करना चाहिए:
1. शिक्षा एवं जागरूकता:
समान शिक्षा व्यवस्था: सभी वर्गों के लिए समान शिक्षा का प्रसार किया जाए ताकि भेदभाव को जड़ से खत्म किया जा सके। जातिवाद विरोधी पाठ्यक्रम: स्कूल और कॉलेजों में जातिवाद से मुक्त समाज के महत्व को पढ़ाया जाए।
सामाजिक जागरूकता अभियान: गांवों, कस्बों और शहरों में जातिवाद के दुष्प्रभावों पर सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जाएं।
2. सामाजिक समरसता के प्रयास:
समान भोज कार्यक्रम: सभी जातियों के लोगों को साथ बैठाकर भोजन करने के कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
सामूहिक विवाह आयोजन: जाति-धर्म से ऊपर उठकर अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा दिया जाए।
सांस्कृतिक एवं खेलकूद कार्यक्रम: जातिगत पहचान के बजाय राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाले आयोजनों पर ध्यान दिया जाए।
3. राजनीतिक सुधार:
जाति-आधारित राजनीति का विरोध: किसी भी राजनीतिक दल द्वारा जाति के आधार पर चुनाव लड़ने या वोट मांगने की प्रवृत्ति का बहिष्कार किया जाए।
आरक्षण नीति में सुधार: आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग की जाए, जिससे सभी जरूरतमंदों को समान अवसर मिले।
4. रोजगार एवं आर्थिक सशक्तिकरण:
समान अवसर नीति: सरकारी और निजी क्षेत्रों में जाति के बजाय योग्यता के आधार पर नौकरियों का चयन सुनिश्चित किया जाए।
स्वरोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा: सभी जातियों के लोगों को उद्यमिता और स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
सामूहिक व्यापार एवं सहकारी समितियाँ: विभिन्न जातियों के लोगों द्वारा मिलकर व्यापार करने की व्यवस्था बनाई जाए।
5. धार्मिक और आध्यात्मिक एकता:
सभी धर्मों में समानता की भावना: जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर भारतीय संस्कृति की एकता को बढ़ावा दिया जाए।
अखंड भारत विचारधारा: भारत को जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर एकता की दृष्टि से देखने का संदेश दिया जाए।
6. कानूनी सुधार और सख्ती:
जातिगत भेदभाव पर कड़ी कार्रवाई: जाति के नाम पर हिंसा, भेदभाव या अन्याय करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
दलित और वंचित वर्गों के प्रति सम्मान: समाज में सभी वर्गों को बराबरी का दर्जा मिले, इसके लिए सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर प्रयास करने चाहिए।
7. सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग:
जातिवाद के खिलाफ प्रचार: सोशल मीडिया पर ऐसे कैंपेन चलाए जाएं जो जातिवाद को खत्म करने की दिशा में काम करें।
युवाओं को जागरूक करना: डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जाति से ऊपर उठकर देश की प्रगति में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाए।
निष्कर्ष:
भारतीय नारायणी सेना यदि इन बिंदुओं पर काम करे, तो यह जाति-पात से ऊपर उठकर समाज को एक नई दिशा दे सकती है। इसके लिए शिक्षा, सामाजिक एकता, आर्थिक सुधार और राजनीतिक चेतना को मिलाकर एक समग्र प्रयास की जरूरत होगी।
भारतीय नारायणी सेना सकारात्मक बदलाव की पैरोकार हैं, जो दुनिया में एक ठोस बदलाव लाने के लिए समर्पित हैं। हमारी स्थापना [वर्ष] के बाद से, हम एक विलक्षण मिशन से प्रेरित हुए हैं: सतत विकास पहल, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल पहुंच और पर्यावरणीय नेतृत्व के माध्यम से व्यक्तियों और समुदायों को सशक्त बनाने के लिए।
हमारे आदर्श https://www.bhartiyanarayanisena.in/
भारतीय नारायणी सेना के मूल्य (Our Values)
- देशभक्ति (Patriotism) – राष्ट्र के प्रति अटूट प्रेम और सेवा की भावना।
- न्याय और सत्य (न्याय और सत्य) – सत्य और न्याय के पथ पर चलने की प्रतिबद्धता।
- शक्ति और साहस (Strength & Courage) – प्रत्येक परिस्थिति में साहस और शक्ति का प्रदर्शन।
- अनुशासन (Discipline) – नियमों और आदेशों का कड़ाई से पालन।
- सेवा और त्याग (Service & Sacrifice) – समाज और देश के लिए निःस्वार्थ सेवा और समर्पण।
- सम्मान और एकता (Respect & Unity) – सभी के प्रति समानता, सम्मान और एकजुटता बनाए रखना।
- धर्म और कर्तव्य (Dharma & Duty) – धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन।
क्या आप इससे संबंधित और जानकारी चाहते हैं?
भारतीय नारायणी सेना संगठन के नए सदस्यों के लिए पदाधिकारियों को परामर्श और संगठन प्रमुख के विचार
संगठन में नए सदस्यों का स्वागत करते हुए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे संगठन की मूल विचारधारा, उद्देश्यों और नियमों को सही तरीके से समझें। संगठन प्रमुख के विचारों के अनुरूप, पदाधिकारियों को निम्नलिखित परामर्श देना चाहिए:
1. संगठन की मूल विचारधारा और उद्देश्य
भारतीय नारायणी सेना जात-पात, धर्म, क्षेत्र और भाषा से ऊपर उठकर राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित संगठन है।
संगठन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक एकता, राष्ट्रीय सुरक्षा, देशभक्ति, और निस्वार्थ सेवा की भावना को बढ़ावा देना है।
प्रत्येक सदस्य को अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए।
2. नए सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण परामर्श
(A) संगठन के प्रति निष्ठा और अनुशासन
✔ संगठन की प्रतिष्ठा: संगठन के आदर्शों और सिद्धांतों के खिलाफ कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए।
✔ नियमों का पालन: संगठन द्वारा निर्धारित नियमों और सिद्धांतों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है।
✔ गोपनीयता बनाए रखना: संगठन की किसी भी गोपनीय जानकारी को बाहरी व्यक्तियों से साझा न करें।
(B) सेवा और समाजहित के कार्य
✔ सामाजिक समरसता: जाति-धर्म से ऊपर उठकर सभी लोगों के साथ समान व्यवहार करना।
✔ जनसेवा: जरूरतमंदों, गरीबों, वृद्धों और वंचितों की मदद करना।
✔ शिक्षा और जागरूकता: समाज में राष्ट्रवाद, देशभक्ति, और स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना।
(C) संगठन में अनुशासन और कर्तव्यपरायणता
✔ संगठन प्रमुख के निर्देशों का पालन: संगठन प्रमुख और वरिष्ठ पदाधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।
✔ समय प्रबंधन: संगठन द्वारा आयोजित बैठकों, अभियानों और कार्यक्रमों में समय पर उपस्थित रहना।
✔ टीम वर्क और सहयोग: संगठन में कार्य करते समय व्यक्तिगत अहंकार से दूर रहकर टीम भावना से कार्य करना।
(D) राष्ट्रभक्ति और चरित्र निर्माण
✔ देश के प्रति वफादारी: हर परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोपरि रखना।
✔ नशा मुक्त जीवन: नशा, गलत आदतों और अनैतिक गतिविधियों से दूर रहना।
✔ सद्भावना और भाईचारा: सभी जातियों और धर्मों के लोगों के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करना।
3. संगठन के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी
पदाधिकारियों को नए सदस्यों के मार्गदर्शन के लिए निम्नलिखित कार्य करने चाहिए:
✔ नए सदस्यों को संगठन की विचारधारा से अवगत कराना।
✔ संगठन के उद्देश्यों और कार्यों को समझाने के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित करना।
✔ सदस्यों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना।
✔ संगठन के किसी भी कार्यक्रम या अभियान में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना।
✔ नए सदस्यों को एकता, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना।
4. संगठन प्रमुख के विचार और संदेश
संगठन प्रमुख के अनुसार, "भारतीय नारायणी सेना केवल एक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा की भावना से प्रेरित एक आंदोलन है।"
✔ यह संगठन उन लोगों के लिए है जो भारत को जाति-पात, भेदभाव और सामाजिक बुराइयों से मुक्त करना चाहते हैं।
✔ प्रत्येक सदस्य को निस्वार्थ सेवा, त्याग एवं निर्देश का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
✔ संगठन में शामिल होने वाले सभी नए सदस्यों को समाज और राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
✔ संगठन के हर सैनिक एक योद्धा की तरह हो, जो अन्याय, कमज़ोर और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध खड़े हो।
भारतीय नारायणी सेना संगठन के नए सदस्यों को इस संगठन की सहमति देकर पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। संगठन के द्वारा उन्हें सही दिशा-निर्देश दिए गए ताकि वे संगठन के समुदायों के देश और समाज की सेवा कर सकें।
हमारा प्रभाव
नामित, जमीनी स्तर की पहल और हमारी टीम के लक्ष्यों के माध्यम से, हमने [प्रभाव के विशिष्ट क्षेत्रों का उल्लेख किया है] में महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए गए हैं। हमारा काम सभी के लिए एक मजबूत, अधिक न्यायसंगत दुनिया बनाने के लिए हमारे मिशन में शामिल हो। एक साथ, हम एक काम कर सकते हैं।
https://www.bhartiyanarayanisena.in/
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